हेलो दोस्तों आज हम बहुत ही रोचक टॉपिक History of computer in hindi नामक इस लेख में बहुत ही आसान और सरल भाषा में जानेंगे। कंप्यूटर के इतिहास को सभी बिन्दुओ पर ध्यान देते हुए बहुत ही बारीक़ से समझेंगे। तो चलिए शुरू करते है।
दोस्तों कहा जाता है की Need is the mother of Invention अर्थात आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है दोस्तों ऐसा ही कुछ हमें कंप्यूटर के साथ भी देखने को मिलता है। कंप्यूटर का अविष्कार कई सौ सालो पहले हुआ था लेकिन समय के साथ वैज्ञानिको और इंजिनियर ने इसे बहुत सारे बदलाव किये जिसका परिणाम आप देख ही सकते है की कैसे कभी एक रूम के बराबर होने वाले कंप्यूटर आज 24 इंच के डिस्प्ले में सिमट गए है।
साइज में बदलाव के साथ आप इनके कार्य क्षमता में भी बदलाव को समझ सकते है वैसे भी ऑनलाइन का जमाना है हर काम आज क समय में कंप्यूटर की मदद से हो रहे है इसलिए आज के समय में आपको हर जगह कंप्यूटर देखने को मिल जायेगा चाहे वो प्राइवेट ऑफिस हो या कोई बड़ा सा सरकारी बैंक। डिजिटल मार्केटिंग में बढ़ोतरी के वजह से कंप्यूटर पर और भी ज्यादा लोड बढ़ा है क्योकि वीडियो एडिटिंग से लेकर वेबसाइट बनाने और मनोरंजन यहाँ तक की गेम खेलने के लिए भी लोग कम्प्यूटर का ही इस्तेमाल कर रहे। तो चलिए समझते है कंप्यूटर क्या है और इसका क्या इतिहास रहा है।
कंप्यूटर क्या है ? | What is computer in hindi
अगर आसान सी भाषा में समझे की कंप्यूटर क्या है तो कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति (Compute) शब्द से हुई है,जिसका अर्थ है गिनती अथवा गणना करना। पारिभाषिक शब्दों में कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो प्रोग्राम ( निर्देशों का समूह) के नियंत्रण में डाटा को प्रोसेस करके सूचना (Information) हमें देता है।
डाटा किसी भी प्रकार का हो सकता है जैसे-किसी व्यक्ति का बायोडाटा, किसी छात्र के अंक, विभिन्न यात्रियों की डिटेल (नाम, उम्र लिंग,) आदि। कंप्यूटर में डाटा को भेजने के लिए इनपुट डिवाइस (Input Device) तथा प्रोसेसिंग के लिए Processing unit व प्राप्त परिणाम को प्रस्तुत करने के लिए आउटपुट डिवाइस(Output Device) होती है।
कंप्यूटर के कितने प्रकार व क्या विशेषताएं हैं
कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं, जिनका वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जा सकता है, जैसे आकार, उपयोग, क्षमता, और उनके कार्यक्षमता के मुताबिक। बात करे उपयोग के आधार पर तो इसे तीन भागो में बाँट सकते हैं –
1 . व्यक्तिगत कंप्यूटर (Personal Computer ) – यह सबसे सामान्य प्रकार का कंप्यूटर होता है जिसका उपयोग व्यक्तिगत कामों के लिए किया जाता है, जैसे कि होमवर्क, इंटरनेट ब्राउज़िंग, गेमिंग आदि। सभी घरो में इसी कंप्यूटर का अधिकतर उपयोग किया जाता है।
2. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer) – यह बड़े संगठनों द्वारा भारी डेटा प्रोसेसिंग के लिए उपयोग किए जाने वाला कंप्यूटर है। यह कई उपयोगकर्ताओं को एक साथ सेवा प्रदान करता है। उदाहरण: बैंकिंग सेक्टर , सरकारी संस्थानआदि।
3. सुपर कंप्यूटर (Super computer) – यह सबसे तेज और शक्तिशाली कंप्यूटर होता है। इसका उपयोग जटिल वैज्ञानिक गणनाओं, मौसम पूर्वानुमान, और परमाणु अनुसंधान में होता है। उदाहरण के लिए परम , Cray आदि।
आकार और प्रदर्शन के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार निम्न है –
1. माइक्रो कंप्यूटर (Micro computer) – यह छोटे आकार और सामान्य उपयोग के लिए उपयुक्त होता है। इसका उपयोग कार्यालय, घर और छोटे व्यवसायों में किया जाता है। उदाहरण: डेस्कटॉप, लैपटॉप आदि ।
2. मिनी कंप्यूटर (Mini computer) – यह मेनफ्रेम कंप्यूटर से छोटा होता है, लेकिन यह अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करने में सक्षम होता है। यह छोटे से मध्यम आकार के व्यवसायों और शैक्षिक संस्थानों में उपयोग किया जाता है।
कंप्यूटर की कुछ विशेषताएं निम्न हैं – History of Computer in Hindi
- इसमें सभी इनफार्मेशन फीड करने के बाद यह स्वचलित रूप से कार्य करता है जिससे हमे रिजल्ट प्राप्त करने के लिए ज्यादा effort नहीं लगाना पड़ता है न ही इसके लिए ज्यादा लोगी की जरुरत होती है।
- इसकी स्पीड इतना तेज़ होती है की मनुष्य जितना काम एक साल में करेगा उतना काम यह कुछ सेकंड में कर सकता है इसलिए इसके होने से हमारे समय की बचत होती है।
- अगर बात करे गलतियों की तो यह हमे ज्यादा से ज्यादा काम बिना कोई गलती किये दे सकता है अगर इनपुट सही है तो आउटपुट यह पूरी 100 % एक्यूरेसी के साथ देता है।
- कंप्यूटर के पास स्टोर करने की क्षमता काफी अधिक होती है जिससे यह ज्यादा से ज्यादा चीज़ो को स्टोर कर सकता है जैसे images , videos , pdf आदि।
- कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता है की यह कभी थकता नहीं है आप जितना इनफार्मेशन डालेंगे यह आपको बिना थके कार्य करके देगा अपनी पूरी स्पीड और accuracy के साथ।
कंप्यूटर की शुरुवात कब हुई | Computer ki Khoj Kab Hui
बात करे कंप्यूटर की शुरुवात की तो इसकी शुरुवात अबेकस बनाने के साथ लगभग 3000 साल पहले चीन में किया गया था। बात 16वीं शताब्दी की है जब पहली बार कंप्यूटर बनाने का आईडिया दिमाग में आया और लड़की का इस्तेमाल कर इसकी शुरुवात की गयी। आइये जानते है कैसे कंप्यूटर यहाँ तक बनकर पहुंचा।
अबेकस ( Abacus)
इसको पहली बार चीन के ली काई चेन ने बनाया था जो की एक मैकेनिकल डिवाइस थी और इसका काम था गणना करना। यह तारो का बना एक फ्रेम होता है तारो में बीड ( पक्की मिट्टी के गोले जिनमें छेद होते हैं) पिरोई होती है इस फ्रेम के दो भाग होते है पहले भाग को Heaven तथा दूसरे बड़े भाग को Earth कहा जाता है।
फ्रेम के एक तरह के प्रत्येक तार में दो बीड होती हैं जिनमें प्रत्येक का मान 5 होता है तथा दूसरे भाग के प्रत्येक तार में 5 बीड होती हैं जिनमें प्रत्येक का मान 1 होता है। यह आयताकार ढांचे का होता है जिसका अधिकतर उपयोग व्यापारी लोग गणना करने में करते थे। इसका उपयोप्ग वर्गमूल निकलने में भी क्या जाता था।
नेपियर बोन्स ( Napier Bons )
यह जानवरो के हड्डियों का बना आयताकार पट्टियां होती थी 10 आयताकार पट्टियो पर 0 से 9 तक के पाहड़े इस प्रकार लिखे होते थे की एक पट्टी के दहाई के अंक दूसरी पट्टी के इकाई के अंक के पास आ जाते थे। इसका इस्तेमाल तेजी से गुणा करने में इस्तेमाल किया जाता था। गुणा करने पर आने वाले परिणाम को ग्राफिकल संरचना द्वारा दर्शाया जाता था।
Charles Babbage and Difference Engine ( चार्ल्स बैबेज और डिफरेंस इंजिन )
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में मैथ्स में प्रोफेसर रहने वाले चार्ल्स बैबेज ने एक मैकेनिकल कैलकुलेटिंग मशीन विकषित की जिससे मानव द्वारा बनाए सारणियो को बिना त्रुटि के हल किया जा सके। चार्ल्स बैबेज ने इस मशीन का निर्माण 1822 में किया जिसका नाम उन्होंने डिफरेंस इंजन रखा। इस मशीन की सहायता से Alegebraic expression एवम statistics को 20 अंकों तक शुद्ता से हल किया जा सकता था। इस मशीन में शाफ्ट, गियर लगे होते थे और यह भाप से चलती थी।
Analytical Engine ( एनालिटिकल इंजन )
डिफरेंस इंजन की सफलता के बाद चार्ल्स बैबेज ने एक और calculating machine तैयार की जिसमे एक आर्टिफिशियल मेमोरी हो और दिए गए प्रोग्राम के अनुसार calculation करे। इस मशीन का नाम उन्होंने Analytical Engine रखा। इस मशीन में पांच मुख्य भाग थे इनपुट इकाई, स्टोर, मिल, कंट्रोल और आउटपुट इकाई । यह मशीन कई प्रकार के गणना संबंधी कार्य करने में सक्षम थी । चार्ल्स बैबेज का यह एनालिटिकल इंजन आधुनिक कंप्यूटर का आधार बना इसलिए ही चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक माना जाता है। इस मशीन में निर्देशों को संग्रहित करने की क्षमता थी और इसके द्वारा परिणाम को स्वचालित रूप से छपे जा सकते थे।
Tabulating machine ( ताबुलेटिंग मशीन )
चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन की परिकल्पना में अमेरिका के वैज्ञानिक हर्मन होलरेथ ने इस मशीन को तैयार किया इस मशीन में पंच कार्डो की सहायता से आंकड़े को संग्रहित किया जाता था। इसमें संख्या पढ़ने का कार्य छेद किए हुए कार्डो द्वारा किया जाता था। इस मशीन की उपयोग से 1890 का जनगणना किया गया था और फिर बाद में 1924 में इसका नाम इंटरनेशनल बिजनेस मशीन रख दिया ।
साल 1940 तक इलेक्ट्रो मेकेनिकल कम्प्यूटिंग शिखर तक पहुंच गई थी । आई बी एम के चार शीर्ष इंजीनियर व डॉक्टर हावर्ड आयिकेन ने इस मशीन को विकषित किया और इसका नाम ऑटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड कैलकुलेटर रखा जो की बाद में इसका नाम बदलकर Mark 1 कर दिया गया था। यह प्रथम पूर्ण स्वचालित electromechanical यन्त्र था।
ENIAC ( एनिएक )
ENIAC का फुल फॉर्म Electronic Numerical Integrator and Calculator है । यह पहला डिजिटल कंप्यूटर था जिसमे 18000 वैक्यूम ट्यूब्स लगी थी साथ ही इसमें बीस Accumulator का संयोजन था। इसका प्रयोग प्राइवेट फर्म , इंजीनियर्स रिसर्च एसोसिएशन और आईबीएम में किया गया था।
कंप्यूटर की सभी पीढ़ियाँ (Generations of The Computer in Hindi )
| क्रम. | पीढ़ी (Generation) | काल (Period) | तकनीक (Technology used) |
| 1 | प्रथम पीढ़ी (1st Gen.) | 1946-1956 | वैक्यूम ट्यूब |
| 2 | द्वितीय पीढ़ी (2nd Gen.) | 1956-1964 | ट्रांजिस्टर |
| 3 | तृतीय पीढ़ी (3rd Gen.) | 1964-1970 | IC (integrated Circuit) |
| 4 | चतुर्थ पीढ़ी (4th Gen.) | 1970-1985 | LSI and VLSI |
| 5 | पंचम पीढ़ी (5th Gen.) | 1985 – अब तक | AI and Robots |
पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स – (First Generation of Computers)
सन् 1940 से सन् 1955 तक के कम्प्यूटर्स को तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर की श्रेणी में रखा गया है ।प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में मेमोरी के लिए चुंबकीय और परिपथीय ड्रम का इस्तेमाल किया गया था जिस वजह से काफी बड़े होते थे और पूरा एक कमरे के बराबर जगह लेते थे। यह काफी ज्यादा बिजली ग्रहण करते थे काफी जल्दी गर्म हो जाते थे जिससे जल्दी खराब भी हो जाते थे। ये कीमत में भी काफी महंगे थे। इनका परिचालन मशीनी भाषा पर निर्भर था जिससे ये एक समय में एक ही समस्या को हल कर पाते थे। यूनिवाइक ( Universal Automatic Computer ) और ई एन आई ए सी ( Electrical Numerical Integrated and Computer ) पहली पीढ़ी के उदाहरण हैं।
दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स – (Second Generation of Computers)
सन् 1956 से सन् 1963 तक के कम्प्यूटर्स को तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर की श्रेणी में रखा गया है ।इस पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया था जिस वजह से दूसरी पीढ़ी अस्तित्व में आई । ट्रांजिस्टर की खोज 1947 में हुई थी लेकिन इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल 1950 के बाद शुरू हुआ और इसके इस्तेमाल के साथ ही कंप्यूटर को छोटा, तेज, सस्ता बनाने के कारगर साबित हुआ ।
इसमें मैग्नेटिक ड्रम के स्थान पर मीग्रेटिक कोर मेमोरी का प्रयोग किया जाने लगा। ट्रांजिस्टर भी गर्मी पैदा करते थे लेकिन वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले कम। दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर भी इनपुट के लिए पंच कार्ड और आउटपुट के लिए प्रिंटआउट पर निर्भर थे। इस पीढ़ी के कंप्यूटर पहले थे जिनका उपयोग परमाणु ऊर्जा उद्योग के लिए प्रयोग किया गया।
तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स – (Third Generation of Computers)
सन् 1964 से सन् 1970 तक के कम्प्यूटर्स को तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर की श्रेणी में रखा गया है । इस पीढ़ी के कंप्यूटर में IC ( Integrated Circuit ) का प्रयोग किया गया था । ट्रांजिस्टर को छोटा कर सिलिकॉन चिप पर लगाया गया जिसे सेमीकंडक्टर कहते थे। इसने कंप्यूटर की क्षमता और गति में काफी बढ़ोतरी की। इसमें इनपुट और आउटपुट के लिए पंच कार्ड और प्रिंटआउट के स्थान पर मॉनिटर और कीबोर्ड को लाया गया साथ ही यूजर को ऑपरेटिंग सिस्टम से रूबरू कराया गया। तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटर में एक नई उच्च स्तरीय भाषा का विकास हुआ जिसका नाम BASIC रखा गया साथ ही यह सीखने में काफी आसान थी।
चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स – (Fourth Generation of Computers)
सन् 1971 से सन् 1984 तक के कम्प्यूटर्स को तृतीय पीढ़ी के कंप्यूटर की श्रेणी में रखा गया है ।इस पीढ़ी में LSI ( Large Scale Integrated ) और VLSI ( Very Large Scale Integrated ) चिप निर्माण से इनपुट, आउटपुट और प्रोसेसिंग यूनिट पर पूरा कंट्रोल हो गया साथ ही कंप्यूटर साइज में भी अब कंप्यूटर को हाथो में लिया जा सकता था। इसकी चिप अंगुली के नाखून के बराबर थी जिसका नाम इंटेल 4004 था बाद में इस छोटे से चिप को माइक्रोप्रोसेसर नाम दिया गया और जिन कंप्यूटर्स में इस चिप का प्रयोग किया गया उन्हें माइक्रो कंप्यूटर नाम दिया गया था। इस पीढ़ी के कंप्यूटर में एप्लीकेशन , डाटाबेस का कार्य करने वाले सॉफ्टवेयर को तैयार किया गया।
पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स – (Fifth Generation of Computers)
सन् 1985 से अब तक के कम्प्यूटर्स को पंचम पीढ़ी में रखा गया है। इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स में कृत्रिम बुद्धिमता के विकास पर जोर दिया जा रहा है लेकिन अब भी विकास की प्रक्रिया में है । इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स को यूजर की जरूरत के अनुसार तैयार किया गया है जो की काफी हल्के और आकार में अट्रैक्टिव नजर आते है । पंचम पीढ़ी में मल्टीमीडिया का विकास काफी हुआ और इंटरनेट का उपयोग अधिक मात्रा में बढ़ा है।
निष्कर्ष ( Conclusion ) –
तो दोस्तों जैसा की आपने History of Computer in Hindi नामक इस लेख में कंप्यूटर क्या है , कंप्यूटर की खोज कब और किसने की साथ ही कंप्यूटर की विशेषताएं व सभी पीढ़ियों के बारे में पढ़ा और जाना। उम्मीद करते है यह लेख आपको पसंद आया होगा। पूरा लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद।
History of Computer in Hindi related FAQ
कंप्यूटर के जनक कौंन हैं ?
कंप्यूटर के जनक महान गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज को माना जाता है।
कंप्यूटर की उत्पत्ति कब हुई ?
कंप्यूटर की उत्पति आज के लगभग 3000 साल पहले हुई ऐसा माना जाता है।
कंप्यूटर की कितनी पीढ़िया हैं ?
कंप्यूटर की कुल पांच पीढ़िया हैं।
पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर कौनसा था ?
ENIAC पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था।